नई दिल्ली, 11 अगस्त (पीटीआई) – दिल्ली-Meerut रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के परिचालन खंड पर साउंड बैरियर्स लगाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि एक अध्ययन में पाया गया है कि शोर का स्तर निर्धारित सीमा के भीतर है। यह जानकारी केंद्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री टोकन साहू ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।
सांसद एस. निरंजन रेड्डी ने पूछा था कि क्या NCRTC ने आवास और शहरी कार्य पर संसदीय स्थायी समिति की पांचवीं रिपोर्ट की सिफारिश के अनुसार साउंड बैरियर्स लगाए हैं।
इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि एनसीआरटीसी (National Capital Region Transport Corporation) ने केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) के अध्ययन के आधार पर बताया है कि शोर का स्तर अनुमेय सीमा के भीतर है, इसलिए वर्तमान में परिचालन खंड पर साउंड बैरियर्स लगाने की योजना नहीं है।
पिछले महीने सरकार ने राज्यसभा को बताया था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-2032 के लिए परिवहन पर कार्यात्मक योजना में आठ रेल-आधारित, हाई-स्पीड, हाई-फ्रीक्वेंसी RRTS कॉरिडोर विकसित करने की सिफारिश की गई है, जो मेट्रोपॉलिटन और बड़े शहरों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों के सिटी सेंटर को जोड़ेगा।
ये आठ सिफारिशित RRTS कॉरिडोर हैं:
दिल्ली-गुरुग्राम-रेवाड़ी-अलवर
दिल्ली-गाज़ियाबाद-Meerut
दिल्ली-सोनपत-पानीपत
दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-पलवल
दिल्ली-बाहादुरगढ़-रोहतक
दिल्ली-शाहदरा-बरौत
गाज़ियाबाद-खुर्जा
गाज़ियाबाद-हापुड़
पूर्व योजना आयोग (अब नीति आयोग) ने विशेष कार्यबल बनाकर दिल्ली-गाज़ियाबाद-Meerut, दिल्ली-गुरुग्राम-SNB और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर को प्राथमिकता दी थी।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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