नई दिल्ली, 21 जुलाई (PTI) — दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि शादी के समय दिया गया हर सामान ‘स्त्रीधन’ नहीं माना जा सकता, और इस आधार पर एक महिला द्वारा शादी में दिए गए सामान — जिसमें एक कार भी शामिल थी — की वापसी की याचिका खारिज कर दी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनिका ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम’ (Protection of Women from Domestic Violence Act) के तहत दाखिल की गई महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थीं।
स्त्रीधन को उस चल या अचल संपत्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है जो किसी महिला को उसके जीवनकाल में, विवाह से पहले, विवाह के समय या संतान जन्म के समय दी जाती है।
अदालत ने कहा:
12 जुलाई को दिए गए आदेश में अदालत ने कहा:
“रिकॉर्ड व साथ संलग्न दस्तावेजों की जांच के बाद, इस चरण पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि याचिका में संलग्न दहेज सूची में उल्लिखित सभी वस्तुएं — जिसमें कार भी शामिल है — याचिकाकर्ता का ‘स्त्रीधन’ थीं।”
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता द्वारा मालिकाना हक साबित करने के लिए कोई प्रथमदृष्टया प्रमाण, जैसे कि बिल, फोटो या गवाहों के हलफनामे, प्रस्तुत नहीं किए गए।
कोर्ट ने कहा:
“इसके अलावा, विवाह के समय दिया गया हर एक सामान स्त्रीधन की श्रेणी में नहीं आता, कुछ वस्तुएं तो केवल उपहार के रूप में भी दी जाती हैं।”
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में जब तक ट्रायल शुरू नहीं हो जाता, तब तक स्वामित्व को लेकर जारी विवाद और असत्यापित सूची के आधार पर स्त्रीधन की वापसी का आदेश नहीं दिया जा सकता।
याचिका खारिज, लेकिन आगे अवसर खुला
अदालत ने महिला की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वे इस विषय में अंतिम निर्णय के समय उचित साक्ष्यों के साथ राहत की मांग कर सकती हैं।
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