नई दिल्ली, 20 अगस्त (PTI) – सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसमें पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है ताकि बेंगलुरु सेंट्रल व अन्य प्रभावित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों की जांच की जा सके।
याचिका में न्यायालय से यह भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि अदालत के आदेशों का पालन और स्वतंत्र ऑडिट पूरा होने तक मतदाता सूचियों में कोई संशोधन या अंतिमकरण न किया जाए।
यह याचिका अधिवक्ता रोहित पांडेय द्वारा दायर की गई है, जिसने 7 अगस्त को राहुल गांधी द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस का जिक्र किया, जहाँ उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत से चुनावों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होने का दावा किया था। इस दावे के समर्थन में उन्होंने कर्नाटक के एक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूचियों के विश्लेषण को प्रस्तुत किया था।
राहुल गांधी ने चुनावों में “वोट चोरी” को “हमारे लोकतंत्र पर परमाणु बम” करार दिया था। इसके बाद कर्नाटक और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने उनसे उन मतदाताओं के नाम साझा करने को कहा था जिन्हें वे मतदाता सूची में “गलत” बताते हैं, ताकि चुनाव अधिकारियों द्वारा “आवश्यक कार्यवाही” की जा सके।
17 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि राहुल गांधी को अपनी शिकायतों पर सात दिनों के भीतर शपथपत्र देना होगा, नहीं तो उनकी “वोट चोरी” की शिकायतें अवैध और निराधार मानी जाएंगी।
याचिका में चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों के निर्माण, रखरखाव और प्रकाशन में पारदर्शिता, जवाबदेही और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है। इसमें डुप्लीकेट या काल्पनिक प्रविष्टियों की पहचान और रोकथाम के लिए उपयुक्त तंत्र विकसित करने की मांग भी शामिल है।
साथ ही मतदाता सूचियों को मशीन-रीडेबल और OCR-समर्थित स्वरूप में प्रकाशित करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है ताकि सूचियों का प्रभावी सत्यापन, ऑडिट और सार्वजनिक जांच संभव हो सके।
याचिका में कहा गया है कि बेंगलुरु सेंट्रल संसदीय क्षेत्र (महालक्ष्मीपुरा विधानसभा क्षेत्र) की मतदाता सूचियों में गंभीर अनियमितताएं हैं, जिन्हें तुरंत संज्ञान लेना आवश्यक है।
यह भी कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप संविधान की पवित्रता बनाए रखने के लिए अनिवार्य है, जिसे केवल न्यायालय प्रभावी तरीके से सुनिश्चित कर सकता है।
महाराष्ट्र में 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद और विधानसभा चुनावों से पहले लगभग चार महीने में 39 लाख नए मतदाता सूची में शामिल किए गए, जबकि पिछले पांच वर्षों में मात्र 50 लाख नए मतदाता जोड़े गए थे। इस अचानक और अनुपयुक्त वृद्धि पर याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पारदर्शी है।
सुप्रीम कोर्ट ने लगातार कहा है कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव संविधान की “बुनियादी संरचना” का हिस्सा हैं और किसी भी विधायी या कार्यकारी कार्यवाही से इसे कमज़ोर नहीं किया जा सकता।
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