नई दिल्ली, 17 जुलाई (PTI) — रेलवे कर्मचारियों की यूनियनों ने स्टाफ हाउसिंग सुविधाओं को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज करवाई हैं, जिनमें नए बने क्वार्टरों के आवंटन में कथित भ्रष्टाचार और पुराने फ्लैटों की खराब स्थिति शामिल है। उन्होंने इस मामले में मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है।
भारतीय रेलवे सिग्नल एंड टेलीकॉम मेंटेनर्स यूनियन (IRSTMU) ने 13 जुलाई को रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि स्टाफ को आवासीय सुविधाएं प्रदान करने वाली हाउसिंग कमेटियों का कार्य “बिल्कुल अपारदर्शी और अनुचित” है।
भारतीय रेलवे कर्मचारी फेडरेशन (IREF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश पांडे ने आवंटन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया और कहा कि कई पुराने क्वार्टरों की हालत इतनी खराब है कि कर्मचारियों को वहां सुरक्षित महसूस नहीं होता।
हालांकि, रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निर्देशक, सूचना एवं जनसंपर्क, दिलीप कुमार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
IRSTMU के महासचिव आलोक चंद्र प्रकाश ने आरोप लगाया कि दलाल अपने पसंदीदा कर्मचारियों को अच्छे क्वार्टर दिलवाते हैं, जबकि जरूरतमंद और योग्य कर्मचारियों को किराए पर मकान लेना पड़ता है। उन्होंने कहा,
“कई मामलों में, जरूरतमंद कर्मचारियों को खाली फ्लैट होने के बावजूद आवंटित नहीं किया जाता।”
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि अहमदाबाद डिवीजन के पलनपुर स्टेशन पर टाइप-4 क्वार्टर कई महीनों से खाली पड़े हैं, लेकिन इन्हें ट्रैक्शन विभाग के पूल में रखने के कारण सिग्नल विभाग के जूनियर इंजीनियर को आवंटित नहीं किया जा रहा।
प्रकाश ने यह भी कहा कि कई स्टेशनों पर अच्छे फ्लैट पाने के लिए दलालों को भारी रिश्वत दी जाती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि क्वार्टरों का आवंटन और उपलब्धता ऑनलाइन की जानी चाहिए, आवंटन ज़रूरत के आधार पर हो और विभागों के बीच पूल सिस्टम समाप्त किया जाए।
साथ ही उन्होंने कहा कि विवादों को खत्म करने के लिए नए बनाए गए फ्लैटों के आवंटन में लॉटरी सिस्टम लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे ने क्वार्टरों के रखरखाव और शिकायत निस्तारण के लिए “रेलवे बिल्डिंग मेंटेनेंस सिस्टम” नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया है, लेकिन इसमें अभी तक ऑनलाइन आवंटन प्रक्रिया नहीं है।
अखिलेश पांडे ने रेलवे के कई स्टेशनों पर क्वार्टरों की दयनीय स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा,
“पुराने रेलवे क्वार्टरों को तत्काल पुनर्निर्माण या पुनःनिर्माण की जरूरत है। अधिकांश फ्लैट खराब रखरखाव के कारण खाली पड़े हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि फंड केवल फाइलों में खर्च होते हैं, जबकि वास्तविकता इसके उलट है। उन्होंने कहा,
“भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि नए बने फ्लैटरों और कार्यालयों को आवंटन के एक-दो साल बाद ही मरम्मत की जरूरत पड़ती है।”
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