रांची, 21 अगस्त (PTI) – झारखंड के पाँच शहरों से बहने वाली नदियों का जल्द ही पुनर्जीवन किया जाएगा और उनके आसपास एक पर्यावरण-मित्र वातावरण विकसित किया जाएगा, यह कार्य केंद्रीय योजना के तहत किया जाएगा।
झारखंड के आदित्यपुर, चास, धनबाद, रांची और साहिबगंज (राजमहल) जैसे शहरों को गंगा, दामोदर, खरकई, हरमु और स्वर्णरेखा नदियों के पुनर्जीवन के पहले चरण के लिए चुना गया है।
यह परियोजना शहरी नदी प्रबंधन योजना (URMP) के अंतर्गत होगी, जो नदी शहर गठबंधन (RCA) का एक प्रमुख घटक है। इस परियोजना का उद्देश्य नदी के जल को साफ रखने के साथ-साथ उसकी निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित करना है। इसके अलावा नदी किनारे विकास और वृक्षारोपण जैसे पर्यावरणीय गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
बुधवार को आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यशाला में झारखंड शहरी विकास और आवास विभाग के सचिव सुनील कुमार ने कहा कि हर शहर की अपनी अलग चुनौतियाँ हैं, इसलिए प्रत्येक के लिए विशिष्ट योजना बनाना जरूरी है।
सुनील कुमार ने बताया कि जिन राज्यों में गंगा नदी का बड़ा बेसिन है, उन्हें नमामी गंगे योजना से अधिक लाभ मिला है। उन्होंने कहा, “झारखंड में गंगा नदी का केवल 80 किलोमीटर हिस्सा है, इसलिए इसकी उपनदियों को भी इस योजना में शामिल करना चाहिए, क्योंकि ये नदियाँ अंततः गंगा को जल प्रदान करती हैं। यह परियोजना गंगा नदी के जल को साफ और प्रवाहित रखने में मदद करेगी।”
राज्य सरकार पहले से ही नदियों के संरक्षण, पुनर्स्थापन, सुंदरता संवर्धन और प्रबंधन के लिए कई कार्यक्रम चला रही है।
सुनील कुमार ने कहा, “हमारी कोशिश नदियों को बुनियादी ढांचा और शहरी विकास की प्राथमिकताओं में शामिल करने की है। नदी किनारे विकास, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण, वृक्षारोपण और नदियों के आसपास पर्यावरण मित्र वातावरण सुनिश्चित करने के कार्य चल रहे हैं।”
नमामी गंगे परियोजना के निदेशक सूरज कुमार ने कहा कि सभी शहरी निकायों को सार्वजनिक सहभागिता बढ़ानी चाहिए और शहरी नदी प्रबंधन योजना तैयार करते समय सभी हितधारकों को शामिल करना चाहिए।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज
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