नई दिल्ली, 3 फरवरी (PTI) – सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को शादी.कॉम के संस्थापक अनुपम मित्तल और दो अन्य को एक फ्रॉड मामले में दो सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की। मामला प्लेटफॉर्म के एक उपयोगकर्ता द्वारा कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया था, जिसमें मित्तल के खिलाफ कार्रवाई को रद्द करने से इनकार किया गया था, और मामले को नए सिरे से विचार के लिए उच्च न्यायालय को भेज दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने मित्तल को अंतरिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के निर्देश भी दिए।
यह मामला हैदराबाद की एक महिला द्वारा लगाए गए आरोप से जुड़ा है, जिसमें उसने कहा कि शादी.कॉम पर एक फर्जी प्रोफ़ाइल का उपयोग कर एक व्यक्ति ने उससे 11 लाख रुपये का फ्रॉड किया और प्लेटफॉर्म ने उपयोगकर्ता की जानकारी को सही तरीके से सत्यापित नहीं किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, “चूंकि खारिज करने की याचिका मेरिट पर नहीं देखी गई है, हम विवादित आदेश को रद्द करते हैं और मामले को उच्च न्यायालय को मेरिट पर विचार के लिए भेजते हैं। इसी प्रकार आपराधिक मामले मूल फ़ाइल में बहाल किए जाते हैं। उच्च न्यायालय इसे मेरिट पर देखेगा। इस अदालत ने मेरिट पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।”
साथ ही अदालत ने कहा, “इस बीच, याचिकाकर्ता अंतरिम राहत के लिए उच्च न्यायालय में प्रार्थना कर सकते हैं। आज से आठ सप्ताह की अवधि तक, याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई जबरदस्ती कदम नहीं उठाया जाएगा।”
सीनियर एडवोकेट आत्माराम नाडकर्णी, जो मित्तल की ओर से पेश हुए, ने कहा कि वे एक मैट्रिमोनियल साइट चला रहे हैं, जो मूल रूप से सिर्फ मैचमेकर है। उन्होंने पूछा, “मैं सिर्फ मेल-मिलाप की सुविधा प्रदान कर रहा हूं। हम जांच में सहयोग कर रहे हैं। लेकिन मुझे आरोपी क्यों बनाया गया?”
26 जून को सर्वोच्च न्यायालय ने तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी किया था और सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। पिछले साल तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मित्तल और अन्य दो आरोपी विग्नेश और सतीश के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज करने से इनकार कर दिया था।
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