सुप्रीम कोर्ट ने NGT द्वारा कंपनी पर लगाए गए 18 करोड़ रुपये पर्यावरणीय जुर्माने को रद्द किया

नई दिल्ली, 1 सितंबर (PTI) – सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश में अपनी शुगर मिल द्वारा पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन के लिए एक कंपनी पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा लगाए गए 18 करोड़ रुपये के जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया।

मनोजय मिश्रा और उज्जल भुयान की बेंच ने कहा कि NGT ने यह फैसला वैधानिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए लिया है।

न्यायमूर्ति भुयान ने कहा कि सामान्यतः प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन के मामलों में पक्षकारों को पुनः उचित प्रक्रिया के तहत सुनवाई का मौका दिया जाता है, लेकिन यहाँ प्रक्रिया की अनदेखी के कारण पूरा मामला ध्वस्त हो गया है।

बेंच ने कहा कि NGT ने एक संयुक्त समिति बनाई थी जो पर्यावरणीय उल्लंघन की जांच करती है, लेकिन इस समिति ने वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया या नहीं, इस पर रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों को बिना सुनवाई के जुर्माना लगाया गया था और यह आदेश अवैध है।

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) निरीक्षण कर संबंधित उल्लंघनों के लिए सुधारात्मक कदम उठा सकता है।

यह मामला एक याचिका से शुरू हुआ था जिसमें आरोप लगाया गया था कि खुंटौली में ट्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की मिल बिना उपचार के कूड़ा-दूषण नदी में डाल रही थी, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा था।

इस मामले में दिसंबर 2021 में हुई निरीक्षणों के आधार पर NGT ने जुर्माना लगाया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है।

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