नई दिल्ली, 14 अगस्त (पीटीआई) – बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत हटाए गए 65 लाख मतदाताओं के विवरण और उनके नाम न शामिल करने के कारणों को प्रकाशित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कांग्रेस ने “उम्मीद की किरण” बताया और कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान को “स्पष्ट, ठोस और साहसिक” तरीके से कायम रखा है।
कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके “सहयोगियों” की “साज़िशों” से गणराज्य को बचाने की यह लंबी लड़ाई है, लेकिन बिहार SIR मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश “पहला विशाल कदम” है।
गुरुवार को न्यायमूर्ति सूर्या कांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें चुनाव आयोग के 24 जून के SIR कराने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने आज भारत के संविधान को स्पष्ट, ठोस और साहसिक तरीके से कायम रखा है। यह गणराज्य को बचाने की लंबी लड़ाई है, लेकिन आज का फैसला उम्मीद की एक किरण है और यह पहला विशाल कदम है।”
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस सूची को अखबारों (क्षेत्रीय और अंग्रेज़ी), टीवी और रेडियो के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए, ताकि लोग जान सकें कि यह सूची कहां उपलब्ध है। अदालत ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची के ड्राफ्ट रोल से हटाए गए हैं, वे अपने आधार कार्ड के साथ चुनाव अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
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