बिहार के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अतिरिक्त महानिदेशक (मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने राज्य में हाल ही में बढ़े अपराधों का कारण कृषि मजदूरों की मौसमी बेरोजगारी को बताया है। उन्होंने बुधवार शाम पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि बिहार में केवल दो बड़े फसल सीजन होते हैं और अप्रैल से जुलाई के बीच फसल का सीजन न होने के कारण अधिकांश खेतिहर मजदूर बेरोजगार रहते हैं। इसी वजह से भूमिसंबंधी झगड़े बढ़ जाते हैं और कुछ युवा तेज़ पैसे के लिए ठेका हत्याओं तक को अंजाम देते हैं। उन्होंने बताया कि मई से जुलाई के बीच हत्या की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं।
बताये गए आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई में बिहार में हत्या के मुकदमे अधिक दर्ज किए जाते हैं। 2024 में अप्रैल में 231, मई में 254, जून में 292 और जुलाई में 279 हत्याएं हुईं जबकि अगस्त में ये कम होकर 249 रह गईं। इसी प्रकार 2023 और 2022 के आंकड़े भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हुई, जहां कई लोग अधिकारी पर कानून-व्यवस्था नियंत्रण में विफलता के लिए बहाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि यह बयान बिहार पुलिस की अक्षमता को दर्शाता है और प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने केंद्र और राज्य की सरकार पर भ्रष्टाचार और अपराध के मामले में आरोप लगाए।
पुलिस अधिकारी कुंदन कृष्णन ने कहा कि उनका कथन आंकड़ों पर आधारित है और उन्होंने बताया कि इस अवधि में हिंसक अपराधों की संख्या बढ़ती है। उन्होंने ठेका हत्याओं की जाँच के लिए विशेष सेल बनाने की भी बात कही।
इस बयान ने बिहार में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गर्मागर्म बहस छेड़ दी है।
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