नई दिल्ली, 23 जुलाई (PTI) — साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए जागरूकता व्याख्यानों की एक श्रृंखला आयोजित की। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-चालित साइबर क्लब की शुरुआत के अवसर पर आयोजित किया गया।
स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बतौर मुख्य वक्ता डिजिटल सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया। विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा:
“साइबर क्लब की यह शुरुआत समय की मांग है। जामिया एक साइबर-सुरक्षित कैंपस के निर्माण में रोल मॉडल बन सकता है।”
साइबर अपराधों के प्रकार और बचाव के उपाय
देवेश श्रीवास्तव ने साइबर अपराधों की विभिन्न श्रेणियों — जैसे कि पहचान की चोरी (identity theft), फिशिंग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर बुलिंग — के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्रों और फैकल्टी को:
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हाल के मामलों की प्रवृत्तियाँ,
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उनसे बचने के तरीके,
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और यदि ऐसा हो तो उन्हें रिपोर्ट कैसे करें,
— इस पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा:
“साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। खासकर छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी डिजिटल गतिविधियों को लेकर सतर्क और जागरूक रहें।”
उन्होंने पासवर्ड नियमित रूप से अपडेट करने, व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने और डिजिटल अधिकारों व खतरों के बारे में जानकारी बनाए रखने की सलाह दी।
म्यूल बैंक खातों से सावधान रहने की सलाह
दक्षिण-पूर्व जिला के उपायुक्त हेमंत तिवारी ने छात्रों को चेताया कि अपराधी हाल के समय में “म्यूल बैंक अकाउंट्स” — यानी अवैध रूप से धन हेराफेरी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खातों — का उपयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा:
“ऑनलाइन अजनबियों से बातचीत करते समय सावधानी बरतें। आजकल कई घोटाले सोशल मीडिया पर भावनात्मक हेरफेर से शुरू होते हैं।”
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे संवेदनशील जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की बिना झिझक रिपोर्ट करें।
मनोवैज्ञानिक पहलू पर ज़ोर
कुलपति मज़हर आसिफ ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला:
“साइबर अपराधी अक्सर लोगों के लोभ और लालच का फायदा उठाते हैं। हमें संतोष की भावना विकसित करनी चाहिए और ऐसे प्रलोभनों से बचना चाहिए जो हमारी निर्णय क्षमता को प्रभावित करते हैं।”
साइबर संस्कृति को प्रोत्साहन
रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने इस पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि इससे विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता की मजबूत संस्कृति विकसित होगी।
डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर और साइबर क्लब की सलाहकार प्रो. नीलोफ़र अफ़ज़ाल ने बताया कि यह नया क्लब नियमित रूप से प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेगा और दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशन्स (IFSO) यूनिट के साथ सहयोग करेगा।
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